पद्मश्री प्रीतम भरतवाण

ज्ञान देव घनस्याली की स्मृति में ‘स्मरणांजलि’ पुस्तक का लोकार्पण, समाजसेवा की प्रेरक गाथा को मिला नया स्वर

पटियाला। हिलाँस सांस्कृतिक कला मंच, पटियाला की ओर से प्रभात परवाना हाल में स्वर्गीय ज्ञानदेव घनस्याली जी को समर्पित पुस्तक “स्मरणांजलि” के लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध उत्तराखंडी लोकगायक एवं जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने अपने करकमलों से पुस्तक का लोकार्पण किया। यह पुस्तक घनस्याली जी के व्यक्तित्व और उनके सामाजिक योगदान को समर्पित है।

पुस्तक का मुख्य संपादन बिजेंद्र रावत दगड़्या ने किया है, जबकि चंद्रमोहन ढौंडियाल ने सह-संपादक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिलाँस सांस्कृतिक कला मंच के प्रधान हरि सिंह भंडारी ने की। इस अवसर पर रघुवीर सिंह नेगी (देहरादून), पूर्व अध्यक्ष गढ़वाली प्रतिनिधि सभा पंजाब तथा एडवोकेट मायाराम देवली (जींद), पूर्व प्रदेश महासचिव उत्तराखंड समाज प्रतिनिधि सभा पंजाब, वरिष्ठ समाजसेवी टंकी सिंह नेगी (देहरादून), गढ़वाली प्रतिनिधि सभा पंजाब के संरक्षक इंजीनियर दया राम ढोंडीयाल (बठिंडा), वरिष्ठ समाजसेवी उत्तम सिंह बागड़ी (पटियाला) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रभात परवाना हाल में किया गया। यह कार्यक्रम मंच के प्रधान हरि सिंह भंडारी, संस्थापक धीरज सिंह रावत, सह-संस्थापक गोबिंद सिंह रावत, संरक्षक दिनेश सिंह चौहान, महासचिव जगदीश प्रसाद भारद्वाज के सफल नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


कार्यक्रम की शुरुआत पटियाला की विभिन्न उत्तराखंडी सभाओं के प्रतिनिधियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से की गई। मंच संचालन करते हुए महासचिव जगदीश प्रसाद भारद्वाज ने एक-एक कर सभी गणमान्य अतिथियों को स्व. घनस्याली जी के जीवन और उनके सामाजिक योगदान पर अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया।

मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. ज्ञानदेव घनस्याली जैसे कर्मयोगी व्यक्तित्व पर लिखी गई यह पुस्तक समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने घनस्याली जी के परिवार को सम्मानित करते हुए कहा कि आज पटियाला में लेखक और साहित्यकारों के बीच अपने परम सखा बिजेंद्र रावत दगड़्या द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक है।

उन्होंने कहा कि पंजाब की समृद्ध धरती पर रह रहे उत्तराखंडी भाई-बहनों को एक सूत्र में पिरोना आसान नहीं होता, लेकिन दगड़्या जी में वह आत्मीयता और संगठन क्षमता है जिससे देवभूमि के लोग एकजुट होकर अपनी संस्कृति और एकता का परिचय देते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे गुमनाम कर्मयोगियों पर चिंतन और लेखन करना एक विराट सोच का परिचायक है और ऐसे व्यक्तित्व पर लिखना वास्तव में वंदनीय कार्य है।

पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति को घनस्याली जी के प्रति समाज के स्नेह और सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडी समाज की एकता देखकर गहरा हर्ष व्यक्त किया और सभी के स्नेह व सम्मान के लिए आभार प्रकट किया।

हिलाँस सांस्कृतिक कला मंच ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में एक यादगार और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया। यह समारोह न केवल पटियाला बल्कि पूरे देश में रह रहे उत्तराखंडी प्रवासियों के लिए प्रेरणादायी मील का पत्थर साबित हुआ। समारोह में स्व. ज्ञान देव घनस्याली जी का परिवार भी काशीपुर और दिल्ली से विशेष रूप से उपस्थित रहा। उनके भाई श्री संत राम जी ने भी अपने भाव व्यक्त किए। संस्था की ओर से स्व. ज्ञान देव जी के परिवार को सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। पटियाला के वरिष्ठ समाजसेवी एवं होटल व्यवसायी श्री मुलायम सिंह राणा, कला मंच के संस्थापक श्री धीरज सिंह रावत, अध्यक्ष श्री हरी सिंह भंडारी तथा महासचिव श्री जगदीश प्रसाद भारद्वाज को समाज और कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “प्रथम स्व. ज्ञान देव घनस्याली स्मृति जन देवा सम्मान” प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही स्मृति ग्रंथ “समरांजलि” के लिए अपने संस्मरण भेजने वाले सभी सम्मानित सदस्यों को भी मंच की ओर से विशेष सम्मान दिया गया। उन्हें पुस्तक की एक-एक प्रति और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर उनके सहयोग और योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह सम्मान समारोह कार्यक्रम का अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण बन गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को समाज सेवा की भावना के प्रति और अधिक प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में मंच के अध्यक्ष श्री हरी सिंह भंडारी ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व. ज्ञान देव घनस्याली जी के आदर्शों और सेवा भावना को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी उपस्थित लोगों ने मंच को बधाई दी।

इस मौके पर संयोजक बीर सिंह सेनवाल, कोषाध्यक्ष प्रदीप कठैत, संगठन सचिव गरीब सिंह रावत, ऑडिटर कैलाश भट्‌ट, कार्यकारिणी सदस्य हरेंद्र सिंह भंडारी, संदीप गुसाईं, मीडिया प्रभारी प्रमोद रावत, निर्देशक विनीता चौहान, सलाहकार कविता मेहरा, नंदी शाही, शीतल तड़ियाल, पूजा रावत, श्वेता तिवारी, सुषमा भारद्वाज, तुलसी मनराल एवं पुष्पा गोस्वामी मौजूद रहीं।