https://youtube.com/live/MBphBJtXVCM पटियाला:हिलाँस सांस्कृतिक कला मंच (रजि.), पटियाला (पंजाब) द्वारा उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ (रजत जयंती) के उपलक्ष्य...
https://youtu.be/aJgZT9XWZx4 पटियाला। हिलांस सांस्कृतिक कला मंच के प्रधान हरि सिंह भंडारी की अध्यक्षता में सार्वजनिक मीटिंग संपन्न हुई। मंच के...
हिमालय की तलहटी में बसा जौनसार-बावर, उत्तराखंड का एक जनजातीय क्षेत्र, अपनी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना...
हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की मिट्टी...
गर्मियों में घर की सफाई को लेकर हमें हमेशा अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होती है, खासकर तब जब छोटे...

संस्कृति के संवाहक हिलॉंस की डिजिटल उड़ान… नमस्कार, सबसे पहले हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आखिर हिलॉंस है क्या ? हिलॉंस उत्तराखंड की डांड्यूं (ऊंचे पर्वतों के घने जंगलों) में रहने वाला एक दुर्लभ पक्षी है। ये पक्षी जब डांड्यूं में बांग देता है तो इसकी मधुर आवाज मंत्रमुग्ध कर देती है। उत्तराखंड की संस्कृति में हिलॉंस का अहम स्थान है। कई उत्तराखंडी गीतों में भी इसका जिक्र आता है। इसी लिए हमने अपनी वेबसाइट के लिए हिलॉंस का ही नाम चुना। इस नाम से अनायास ही उत्तराखंड की यादें जहन में हिलोरें लेने लगती हैं। सभी को उत्तराखंड याद आ जाता है। तो आप तक उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू पहुंचाने के लिए www.hillans.com वेबसाइट को अस्तित्व में लाया गया है।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां आप तक पहुंचाने का प्रयास। उत्तराखंडी सभाओं और सांस्कृतिक कला मंचों के कार्यक्रमों से आपको अवगत कराते हैं। आप भी देवभूमि के साथ जुड़ना चाहते हैं तो जरूर सहयोग करें। जय देव भूमि

किसी भी राज्य य देश की आत्मा उसकी संस्कृति होती है। संस्कृति से ही सकारात्मक जीवन जीया जा सकता है। संस्कृति जीवन का आधार है। संस्कृति ही किसी इलाके की जीवन शैली की सूचक है, इसी से किसी इलाके या कम्युनिटी के खान-पान, पहरावे और रहन-सहन का पता चलता है। इतिहास, खान-पान, रहन-सहन आदि संस्कृति कहलाती हैं।
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उत्तराखंड में पर्यटन स्थलों की कोई कमी नहीं। एक बार उत्तराखंड पहुंच गए तो समझो स्वर्ग मिल गया। यहां की हसीन वादियां, झरझर बहते झरने, कलकल करती नदियां आंखों का शीतल कर देती हैं और मन को पूरी तरह मोह लेती हैं। देवभूमि उत्तराखंड में सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन को ज्यादा महत्व दिया जाता है।
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उत्तराखंड के पकवान अब दूर देशों में भी पसंद किए जाने लगे हैं। देश-विदेशों में उत्तराखंडी रेस्टोरेंट चलने लगे हैं। यहां के शुद्ध पकवान न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि यह शरीर की पौष्टिकता को बरकरार भी रखते हैं और इस कारण व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से शरीर को बचा सकता है। उत्तराखंडी व्यंजनों में आपको स्वाद के साथ-साथ सेहत से भरपूर खजाना मिलेगा।
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