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पटियाला में उत्तराखंड के लोकगायक दर्शन फरसवाण पटियाला में पहली बार लगाएंगे जागर

पटियाला। हिलांस सांस्कृतिक कला मंच के प्रधान हरि सिंह भंडारी की अध्यक्षता में सार्वजनिक मीटिंग संपन्न हुई। मंच के आगामी कार्यक्रम के लिए मंच के महासचिव जगदीश प्रसाद भारद्वाज के प्रस्ताव के मुताबिक सभी सदस्यों ने 2 नवंबर 2025 के कार्यक्रम के लिए सहमति दी है एवं सभी सदस्यों ने प्रस्ताव पास किए हैं। मंच के संस्थापक धीरज सिंह रावत ने कहा कि मंच हर साल अप्रैल में कार्यक्रम करता आ रहा है, इस साल अप्रैल का कार्यक्रम नहीं हो सका। इस करके हमने नवंबर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम करना है। मंच के संरक्षक दिनेश सिंह चौहान और संयोजक बीर सिंह सेनवाल ने अपने सुझाव दिए और 02 नवंबर 2025 के कार्यक्रम का समर्थन किया। इसके अलावा मंच के संगठन मंत्री गरीब सिंह रावत, कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह कठैत, निर्देशिका विनीता चौहान एवं मीडिया प्रभारी प्रमोद रावत ने कहा कि कार्यक्रम में उत्तराखंड के लोक गायक दर्शन फर्सवान को प्रस्तुति के लिए बुलाया जाए। सभी की सहमति पर अपने-अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रधान हरि सिंह भंडारी ने 02 नवंबर 2025 दिन रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम “जागर” का आयोजन करने पर सहमति दी।

नंतराम नेगी: मुगल सेना को धूल चटाने वाला जौनसार-बावर का शेर

हिमालय की तलहटी में बसा जौनसार-बावर, उत्तराखंड का एक जनजातीय क्षेत्र, अपनी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। यहाँ की भूमि ने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से इतिहास के पन्नों को स्वर्णिम बनाया। इनमें से एक नाम है नंतराम नेगी, जिनकी शौर्यगाथा आज भी लोकगीतों में गूंजती है। मुगल सेना के खिलाफ उनकी वीरता ने उन्हें “गुलदार” की उपाधि दिलाई और भारत के युद्ध इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी।

जौनसार-बावर, देहरादून के पश्चिमी छोर पर स्थित, भले ही भौगोलिक रूप से दुर्गम हो, लेकिन यहाँ की संस्कृति और परंपराएँ इसे अनूठा बनाती हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र सादगी और साहस का संगम है। इसी वीरभूमि में 1725 के आसपास नंतराम नेगी का जन्म हुआ। उस समय यह इलाका सिरमौर रियासत का हिस्सा था, जिसकी राजधानी नाहन (अब हिमाचल प्रदेश) में थी। नंतराम के पिता लाल सिंह और माता झंझारी देवी थे। बचपन से ही नंतराम में तलवारबाजी और जोखिम भरे खेलों का जुनून था। उनकी फुर्ती और नन्ही उम्र में दिखाया गया साहस उन्हें सिरमौर के राजा शमशेर प्रकाश की सेना में ले आया।

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अनुसूया प्रसाद बहुगुणा: स्वतंत्रता संग्राम का अनमोल रत्न, ‘गढ़केसरी’ का गौरव

हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की मिट्टी ने उन अनगिनत नायकों को जन्म दिया है, जिन्होंने देश के इतिहास को स्वर्णिम अक्षरों में लिखा। यहाँ की दुर्गम पहाड़ियाँ, घने जंगल और कठिन जीवनशैली के बीच पनपी वीरता और देशभक्ति की कहानियाँ आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इन्हीं कहानियों में एक नाम चमकता है—अनुसूया प्रसाद बहुगुणा, जिन्हें गढ़वाल की जनता ने ‘गढ़केसरी’ की उपाधि से नवाजा। यह नाम न केवल उनकी शेरदिली का प्रतीक है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय योगदान का भी गवाह है।
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ऐसे लगाएं पोछा, घर भी चमके और मुक्खियां रहें दूर

गर्मियों में घर की सफाई को लेकर हमें हमेशा अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होती है, खासकर तब जब छोटे बच्चे घर में हों। मक्खियों और बैक्टीरिया से बचने के लिए सिर्फ झाड़ू लगाना ही काफी नहीं होता, बल्कि नियमित रूप से पोछा लगाना भी जरूरी है। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर की फर्श हमेशा साफ और चमकदार रहे, तो आपको कुछ खास चीजें पोछे के पानी में मिलानी चाहिए। ये चीजें न सिर्फ आपकी फर्श को चमकदार बनाएंगी, बल्कि मक्खियों और बैक्टीरिया को भी दूर रखेंगी।

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हिमालय की एक कथा: अजुआ बफौल

हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच, बहुत समय पहले, पांच देवता एक यात्रा पर निकले। विश्राम के दौरान उन्होंने मनोरंजन के लिए मिट्टी के चार गोले बनाए और उन्हें चार दिशाओं में फेंक दिया। इन गोलों से चार विशाल और बलशाली योद्धा प्रकट हुए। इन योद्धाओं ने देवताओं से अपनी उत्पत्ति का कारण पूछा। देवताओं ने हंसते हुए कहा, “हम तो बस खेल रहे थे, उसी में तुम बन गए।” योद्धाओं ने कार्य मांगा, तो देवताओं ने कहा, “जाओ, दुनिया घूमो, अपनी शक्ति का परिचय दो।”

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उत्तराखण्ड के भीष्म पितामाह! बैरिस्टर मुकंदीलाल

उत्तराखंड भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को संजोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पावन भूमि ने अनेक विभूतियों को जन्म दिया है, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में देश और दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इन्हीं महान व्यक्तित्वों में से एक हैं बैरिस्टर मुकुंदीलाल।

बैरिस्टर मुकुंदीलाल को एक प्रसिद्ध वकील, कुशल प्रशासक, कला मर्मज्ञ, लेखक, पत्रकार, शिकारी, फोटोग्राफर, पक्षी और पुष्प प्रेमी के रूप में जाना जाता है। वे अपनी सृजनात्मक और गुणात्मक विशिष्टताओं के लिए प्रसिद्ध थे।

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वजन घटाने का सुपरफूड: जौ का दलिया!

अगर आप तेजी से बढ़ते वजन से परेशान हैं और एक हेल्दी डाइट की तलाश में हैं, तो जौ का दलिया (Barley Porridge) आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है। यह सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है, जो वजन कम करने के साथ-साथ शरीर को कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। गेहूं के दलिया की तुलना में जौ का दलिया अधिक फाइबरयुक्त होता है, जिससे यह वजन घटाने में और भी ज्यादा कारगर साबित होता है।

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हड्डियों से प्यूरिन हटाने का रामबाण उपाय! यूरिक एसिड कंट्रोल करने के लिए जादुई दालचीनी पानी

दालचीनी (Cinnamon) सिर्फ एक साधारण मसाला नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण इसे एक प्रभावी प्राकृतिक औषधि बनाते हैं। खासतौर पर यूरिक एसिड से परेशान लोगों के लिए, यह किसी वरदान से कम नहीं। दालचीनी में मौजूद सिनामाल्डिहाइड (Cinnamaldehyde) यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करता है और इसका सही इस्तेमाल क्या है।

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स्वास्थ्य: पैनक्रियाटाइटिस (Pancreatitis)

पैनक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) पैंक्रियास (pancreas) की सूजन को कहा जाता है । पैंक्रियास शरीर में एक महत्वपूर्ण अंग होता है जो पाचन में मदद करने के लिए एन्जाइम्स (enzymes) और इंसुलिन (insulin) का उत्पादन करता है । जब पैंक्रियास में सूजन होती है, तो यह शरीर के पाचन तंत्र को प्रभावित करता है और कई प्रकार के स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है ।
• पैनक्रियाटाइटिस दो प्रकार का होता है:
1. अक्यूट पैनक्रियाटाइटिस (Acute Pancreatitis): यह अचानक शुरू होने वाली सूजन है और आमतौर पर गंभीर दर्द और अन्य लक्षणों के साथ होती है । यह
आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो सकता है यदि समय पर इलाज किया जाए ।
2. क्रोनिक पैनक्रियाटाइटिस (Chronic Pancreatitis): यह लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन है, जो पैंक्रियास में स्थायी क्षति का कारण बन सकती है । यह पाचन
और इंसुलिन उत्पादन को प्रभावित कर सकता है । Read More

गढ़वाल के स्वाधीनता सेनानी: भैरव दत्त धूलिया

गढ़वाल में स्वतंत्रता संग्राम और जन जागरण के अग्रणी योद्धा भैरव दत्त धूलिया का जन्म 1900 में पौड़ी गढ़वाल के मदनपुर पट्टी लंगूर वल्ला डाडामंडी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम हरदत्त था।

भैरव दत्त धूलिया गढ़वाल कांग्रेस कमेटी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 1921 में, उन्होंने मुकंदीलाल, अनुसूया प्रसाद बहुगुणा, मंगतराम खंतवाल, केशर सिंह रावत और गोवर्धन बड़ोला के साथ कुली बेगार आंदोलन के रूप में असहयोग आंदोलन को पहाड़ों में सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया। 1921 से 1935 तक उन्होंने गढ़वाल में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया। Read More